top of page
Image by NordWood Themes
Image by NordWood Themes

मसर्रत औ मलाल


छूटे थे जो बिछड़े

मुश्तएक मिल रहे हैं

मिलकर भी जो घुल न सके

वे बारी बारी बिछुड़ रहे हैं

ज़िंदगी धोखा है

या ये धोखा भी इक ख़्वाब

जो भी हो

धोखे और ख़्वाब में

मसर्रत औ मलाल क्या कीजै

आख़िर जो मिल ही नहीं सकते कभी

वही बिछुड़ रहे हैं

जो पहले से घुले थे

वही मिल रहे हैं

धर्मराज

04/08/2023


4 views0 comments

Recent Posts

See All
bottom of page