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उम्मीद बहुत है

May 29, 2023
1 min read


चलने को पाँव नहीं हैं

कंधे दोनों थूनी पर हैं

क्षितिज का पाल्हा छू पाऊँगा

इसकी मुझको उम्मीद बहुत है

आँखें मेरी मुझपे ही मुँदी ढँपी हैं

दावा मेरा दुनिया देखी है

रहा सहा भी दिख जाएगा

इसकी मुझको उम्मीद बहुत है

सऊर नहीं है नाते का

बेसऊरी से रिश्तेदारी गाढ़ी है

बेसऊरी का सऊर पा जाऊँगा

इसकी मुझको उम्मीद बहुत है

होना अपना तिरछा आड़ा है

अपनी ही टाँगें अपने से उलझी है

इक दिन पूरी दुनिया सीधी सुलझी हो जाएगी

इसकी मुझको उम्मीद बहुत है

सोना मेरा सोना है

जगना भी मेरा सपना ही है

सपने में इक दिन मैं जग जाऊँगा

इसकी मुझको उम्मीद बहुत है

आँखें मेरी खसोट रही हैं

सीने में तो मेरे रेत भरी है

सारे जग का प्रेम मुझे ही मिलेगा

इसकी मुझको उम्मीद बहुत है

भले ही मुझको मेरा होना अनजागा है

पर अपने बारे में ज्ञान मुचामुच है

आतम ज्ञानी हो जाऊँगा

इसकी मुझको उम्मीद बहुत है


धर्मराज

01 September 2022


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