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सूने गाँव के अतिथि

May 16, 2023
1 min read


अतिथियों

पधारो कभी इस गाँव में

जहाँ कोई आतिथेय नहीं है

गाँव के हर घर पर बंदनवार टँगे हैं

रंगोली सजी है

घर की दीवारें बासंती रंगी हैं

आतिथेय कोई नहीं है

पधारो इस घर में

यहाँ भोर का चूल्हा जल चुका है

कलेवा बस तैयार होने को है

नहाने को गर्म पानी रखा जा चुका है

आँगन में नीम तले खाट पर उजली चादर बिछी है

आतिथेय कोई नहीं है

पधारो गर्भगृह में

जहाँ घी की दियली मद्धिम जल रही है

खुले झरोंखे से रजनीगँधा

नदी से आती शीतल पवन सँग

तन त्याग बिखरती जा रही है

आतिथेय कोई नहीं है

पधार सको तो

पधारो सुहागसेज पर

जिन पर गुलाब की खुद से झरी

पंखुरियाँ बिछी हैं

न वर न वधू यहाँ

आतिथेय कोई नहीं है

धर्मराज

09 December 2021


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