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रस रहस्य

Jul 25, 2021
1 min read


नेति नेति के चरम शिखर पर

जब मैंने स्वयं को ही नहीं पाया

किसी परमात्मा को भी नहीं पाया

तो यह कौन है

जो मुझसे पूजा के थाल लिए चला आता है

किसकी अर्चना होती है मुझसे

यह कौन है और किसको दण्डवत करता है

किसके स्वस्तिगान को

हृदय में गीत उमड़ते हैं

यह कौन है और किसके दर्शन पा

थिरकता जाता है


न मैं हूँ न ही परमात्मा है

फिर यह हृदय प्रेमसिक्त क्यूँ है

और किसके लिए है

यह मुझमें कौन है और किसके साथ

गलबहियाँ डाले रास रचाता है

जब इतनी भीतर चुप्पी है तो

वह कौन है जो प्रार्थना में रस लेता है

और वह कौन है

जो बिना पुकारे सदा सर्वदा उपस्थित है

यह नित नित किन अकथ्य रहस्यों का

और और विराट रहस्यों में पटाक्षेप होता जाता है

आह! जिस अद्वय में

देशकाल संग अहंकार की इति को परम पुरुषार्थ समझा गया

क्या वह मात्र शुभारम्भ भर ही है

धर्मराज

20/07/2020


 
 
 

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